Generation of Computers – कंप्यूटर की 5 पीढियाँ

कंप्यूटर का विकास या कंप्यूटर का इतिहास एक कंप्यूटर विज्ञान का विषय है| जिसे अक्सर कंप्यूटर उपकरणों की विभिन्न पीढ़ियों को संदर्भित करने के लिए उपयोग किया जाता है। उपकरणों में प्रमुख तकनीकी विकास की दृष्टि से Generation of Computers को पांच पीढ़ियों में बाँटा गया है| इनमे से प्रत्येक पीढ़ी में उपकरणों में कुछ ऐसे तकनीकी विकास किये गए हैं, जिससे कंप्यूटर संचालन के तरीको में मौलिक रूप से बदलाव हुआ है।

1940 के दशक से लेकर आज तक के अधिकांश प्रमुख विकासों के परिणामस्वरूप तेजी से छोटे, सस्ते, अधिक शक्तिशाली और अधिक कुशल कंप्यूटर बनाए गए हैं।

 

Generation of Computers – कंप्यूटर की पांच पीढ़ियां क्या हैं?

कंप्यूटर का विकास कब से आरम्भ हुआ यह ठीक से कह पाना बहुत मुश्किल है, इसीलिए हम इस लेख में आधुनिक कंप्यूटर के विकाश की बातें करेंगे| इस लेख में आप कंप्यूटर की पांचों पीढ़ियों में से प्रत्येक के तकनिकी प्रगति के बारे में विस्तार से जानेंगे| कंप्यूटर की पांच पीढ़ियों की हमारी यात्रा 1940 में वैक्यूम ट्यूब सर्किट – Vaccum Tube Circuit के साथ शुरू होती है और वर्तमान समय तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता – Artificial Intelligence (AI) सिस्टम और उपकरणों के साथ आगे बढ़ती है।

 

कंप्यूटर की पाँच पीढियाँ 5 Generation of Computers – महत्वपूर्ण तथ्य

निम्नलिखित तकनीकी शब्द आपको कंप्यूटर की पाँच पीढ़ियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगी:

  • computer
  • microprocessor
  • magnetic drums
  • binary
  • integrated circuit
  • semiconductor
  • machine language
  • assembly language
  • artificial intelligence

 

FIRST GENERATION: “VACUUM TUBES” (1940-1956)

(पहली पीढ़ी के कंप्यूटर)

पहली पीढ़ी के कंप्यूटर का दौर 1940 से 1956 तक का माना जाता है| इस दौर के कंप्यूटर सिस्टम में मेमोरी – Memory और सर्किटरी – Circuitry जैसे बुनयादी घटकों के लिये वैक्यूम ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता था| इनका आकर लगभग एक पुरे कमरे के जितना विशालकाय होता था| इन कंप्यूटरों को संचालित करना बहुत महंगा था और बहुत अधिक बिजली का उपयोग करने के अलावा, पहली पीढ़ी के कंप्यूटर – First Generation Computers, बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न करते थे|

पहली पीढ़ी के कंप्यूटर मशीनी भाषा – Machine Language पर निर्भर थे, जो कंप्यूटर द्वारा समझी जाने वाली निम्नतम स्तर – Low Level की प्रोग्रामिंग भाषा थी, जो संचालन करने के लिए थी, और वे एक समय में केवल एक ही समस्या का समाधान कर सकते थे। इनपुट छिद्रित कार्ड – Punch Card और पेपर टेप पर आधारित था, और आउटपुट प्रिंटआउट द्वारा प्रदर्शित किया जाता था।

UNIVAC और ENIAC कंप्यूटर पहली पीढ़ी के कंप्यूटर उपकरणों के उदाहरण हैं। UNIVAC को पहला व्यावसायिक कंप्यूटर भी कहा जाता है|

 

SECOND GENERATION: “TRANSISTORS” (1956-1964)

(दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर)

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर का दौर 1956 से 1964 तक था| दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों में वैक्यूम ट्यूबों की जगह ट्रांजिस्टर – Transistors का इस्तेमाल होने लगा था| 1947 में बेल लैब्स में ट्रांजिस्टर – Transistor का आविष्कार किया गया था, लेकिन 1950 के दशक के अंत तक कंप्यूटर में इसका व्यापक उपयोग नहीं हो पाया था|

ट्रांजिस्टर – Transistors वैक्यूम ट्यूब से कहीं बेहतर थे, जिससे कंप्यूटर अपने पहली पीढ़ी के पूर्ववर्तियों की तुलना में छोटे, तेज, सस्ता, अधिक ऊर्जा-कुशल और अधिक विश्वसनीय हो गए। हालाँकि ट्रांजिस्टर भी बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न करते थे। दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर भी इनपुट के लिए पंच कार्ड और आउटपुट के लिए प्रिंटआउट पर निर्भर थे।

बाइनरी – BINARY से असेंबली – ASSEMBLY

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर बाइनरी मशीन भाषा (Binary Machine language) का इस्तेमाल न करके प्रतीकात्मक (Symbolic), या असेंबली भाषाओं (Assembly Languages) का इस्तेमाल करेने लगे| जिससे प्रोग्रामर को शब्दों में निर्देश देने की सुविधा प्राप्त हुई। इस समय तक उच्च-स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाएँ – High Level Languages भी विकसित की जा रही थीं, जैसे COBOL और FORTRAN के शुरुआती संस्करण।

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर ऐसे पहले कंप्यूटर थे जिन्होंने अपने निर्देशों को अपनी स्मृति  (Storage) में संग्रहीत करना आरंभ किया| इस पीढ़ी में Storage के लिये चुंबकीय ड्रम (magnetic drum) तकनीक के स्थान पर चुंबकीय कोर (magnetic core) तकनीक का इस्तेमाल किया जाने लगा|

 

THIRD GENERATION: “INTEGRATED CIRCUITS” (1965-1971)

(तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर)

1965 से 1971 तक के समय को कंप्यूटर के तीसरी पीढ़ी के दौर के रूप में जाना जाता है| इंटीग्रेटेड सर्किट – Integrated Circuit (IC) का विकास तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों की पहचान थी। ट्रांजिस्टर को छोटा किया गया और सिलिकॉन चिप्स पर रखा गया, जिसे सेमीकंडक्टर्स (Semiconductors) कहा जाता है| जिससे कंप्यूटर की गति, क्षमता और दक्षता में काफी वृद्धि हुई|

छिद्रित कार्ड – Punch Card और प्रिंटआउट के बजाय, उपयोगकर्ताओं ने तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों के साथ Keyboard और Monitor का उपयोग आरम्भ कर दिया था| तीसरी पीढ़ी में ही ऑपरेटिंग सिस्टम – Operating System (OS) का प्रयोग एक Interface की तरह किया जाने लगा था| ऑपरेटिंग सिस्टम – Operating System (OS) ने एक समय में कई अलग-अलग अनुप्रयोगों को एक केंद्रीय प्रोग्राम के साथ चलाने की अनुमति दी जिसकी निगरानी Memory करता था।

Integrated Circuit, सेमीकंडक्टर द्वारा बना एक छोटा सा Electronic उपकरण होता है| 1950 के दशक में Integrated Circuit, Jack Kilby और Robert Noyce द्वारा विकसित किया गया था|

 

FOURTH GENERATION: “MICROPROCESSORS” (1971-1980)

(चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर)

कंप्यूटर की चौथी पीढ़ी 1971 से 1980 के दशक को माना गया| चौथी पीढ़ी में माइक्रोप्रोसेसर – Microprocessor ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी थी| जो कि हजारों एकीकृत सर्किट – Integrated Circuit (IC) को मिलाकर एक सिलिकॉन चिप पर बनाए गए थे। पहली पीढ़ी में जो एक पूरा कमरा भरता था वह अब हाथ की हथेली में समाने लगा|

1971 में इंटेल – Intel ने Microprocessor 4004 चिप विकसित की थी| जिसमे सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट – Central Processing Unit (CPU) और मेमोरी से लेकर इनपुट/आउटपुट कंट्रोल तक कंप्यूटर के सभी घटकों को एक ही चिप पर रखा गया था|

1981 में, IBM ने घरेलू उपयोगकर्ताओ के लिए अपना पहला कंप्यूटर पेश किया और 1984 में Apple ने Macintosh को बाज़ार में उतरा था|

जैसे-जैसे ये छोटे कंप्यूटर अधिक शक्तिशाली होते गए, इन्हें नेटवर्क बनाने के लिए एक साथ जोड़ा गया, जिससे अंततः इंटरनेट का विकास हुआ। चौथी पीढ़ी के कंप्यूटरों ने GUI, Mouse और हाथ में पकड़े जाने वाले उपकरणों का भी विकास देखा।

 

FIFTH GENERATION: ARTIFICIAL INTELLIGENCE (1980 – PRESENT AND BEYOND)

(पांचवीं पीढ़ी के कंप्यूटर)

सन 1980 से लेकर अबतक और आगे के वर्षों को भी कंप्यूटर के क्षेत्र में पांचवीं पीढ़ी माना गया है| आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – Artificial Intelligence (AI) पर आधारित पांचवीं पीढ़ी के कंप्यूटर सिस्टम अभी भी विकासशील अवस्था में हैं, हालांकि कुछ एप्लिकेशन हैं, जैसे कि आवाज की पहचान – Voice Recognition आदि का उपयोग आज किया जा रहा है।

Parallel processing जैसे आधुनिक तकनीक और superconductors का उपयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – Artificial Intelligence (AI) पद्धति को और वास्तविक बनाने के लिये सहायक हो रही हैं|

 

Generation of Computers लेख से आज आपने क्या सिखा?

मैं आशा करता हूँ, Generation of Computers इस लेख से आपके ज्ञान में वृद्धि हुई होगी| इस लेख से कंप्यूटर की विभिन्न पीढ़ियों में आये महत्वपूर्ण बदलाव के बारे में आपको बताने का पूरा प्रयत्न किया गया है| उम्मींद है आप हमारे कोशिश की सरहाना करेंगे| फिर भी आपके मन में इस लेख से सम्बंधित कोई शंका, सवाल या सुझाव हो तो कृपया नीचे कमेंट कर हमें बताये।

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